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kan_Knda | san_Deva | ಅದು ಬುದ್ಧಿತತ್ವದ ಪರಿಣಾಮದ ವಿಶೇಷವಾಗಿದೆ. | तच्च बुद्धितत्त्वस्यपरिणामविशेषः। |
kan_Knda | hin_Deva | ಅವ್ಯಯೀಭಾವ ಸಮಾಸದಲ್ಲಿ ಶರದಾದಿ ಪ್ರಾತಿಪದಿಕಗಳ ನಂತರ ಸಮಾಸಾಂತದಿಂದ ತದ್ಧಿತ ಸಂಜ್ಞಕದ ಟಚ್ ಪ್ರತ್ಯಯವಾಗುತ್ತದೆ. | अव्ययीभाव समास में शरद आदि प्रातिपदिक से पर (आगे) समासान्त से तद्धित संज्ञक टच् प्रत्यय होता है। |
san_Deva | hin_Deva | ततश्च अत्र सूत्रार्थः भवति- यज्ञकर्मणि वषट्कारः अर्थात् वौषट्- शब्दः एकश्रुतिः उदात्ततरो वा भवतीति। | और उससे यहाँ सूत्र का अर्थ होता है - यज्ञकर्म में वषट्कारः अर्थात् वौषट्- शब्द एक श्रुति उदात्ततर विकल्प से होता है। |
san_Deva | hin_Deva | श्येननामको बलवान् पक्षीव दूरगमनात्तव भयमासीदिति गम्यते। | बाज नाम का बलवान पक्षी अत्यन्त दूर जाने के लिए भयभीत नहीं होता है। |
hin_Deva | kan_Knda | उपासना विद्यारूपी होती है। | ಉಪಾಸನೆಯು ವಿದ್ಯಾರೂಪಾವಾಗಿದೆ. |
san_Deva | kan_Knda | सूत्रार्थसमन्वयः- गुपूधातोः पकारोत्तरस्य ऊकारस्य इत्संज्ञायां तस्य लोपः इत्यनेन लोपे च गुप् इति स्थिते अस्य धातोः एकः एव अच् विद्यते तेन यथा कस्यापि यदि एकः एव पुत्रः स्यात् तर्हि स एव आदिः स एव अन्तः तद्वद् अत्रापि गुप्धातोः गकारोत्तरः उकारः एव आदिः अकारः एव अन्तः, अतः अस्य अकारस्य प्रकृतसूत्रेण उदात्तस्वरः। | ಸೂತ್ರಾರ್ಥದ ಸಮನ್ವಯ - 'ಗುಪೂ'ಧಾತುವಿನ ಪಕಾರದ ಮುಂದಿರುವ ಊಕಾರದ 'ಇತ್'ಸಂಜ್ಞೆಯಾಗಿ "ತಸ್ಯ ಲೋಪಃ" ಎನ್ನುವುದರಿಂದ ಲೋಪವುಂಟಾಗುತ್ತದೆ. ಹಾಗಾಗಿ 'ಗುಪ್'ಧಾತುವಿನಲ್ಲಿ ಒಂದೇ 'ಅಚ್' ಇದೆ. ಯಾರಿಗೆ ಒಬ್ಬನೇ ಮಗನಿರುತ್ತಾನೋ ಅವನೇ ಅವರ ಮೊದಲ ಮಗನೂ, ಕೊನೆಯ ಮಗನೂ ಆಗಿರುತ್ತಾನೆ. ಹಾಗೆ ಇಲ್ಲಿ 'ಗುಪ್'ಧಾತುವಿನಲ್ಲಿ ಗಕಾರದ ಮುಂದಿರುವ ಉಕಾರವು ಆದಿಯು ಹಾಗೂ ಅಂತ್ಯದಲ್ಲಿರುವ ಅಚ್ ಆಗಿದೆ. ಹಾಗಾಗಿ ಆ... |
kan_Knda | hin_Deva | ವೇದಗಳನ್ನು ರಕ್ಷಿಸುವುದಕ್ಕಾಗಿ ವ್ಯಾಕರಣದ ಅಧ್ಯಯನವು ಅತ್ಯಂತ ಆವಶ್ಯಕವಾಗಿರುತ್ತದೆ. | बेद की रक्षा के लिए व्याकरण अध्ययन अत्यन्त आवश्यक है। |
san_Deva | hin_Deva | साधनचतुष्टये अन्यतमं साधनं शमादिषट्कसम्पत्तिः। | साधन चतुष्टय में अन्यतमसाधन शमादिषट्क सम्पत्ति है। |
kan_Knda | san_Deva | ಈ ಬಂಧನದಿಂದಲೇ ತ್ರಾಣವು ಮೋಕ್ಷವು ಆಗುತ್ತದೆ. | अस्मादेव बन्धनात् त्राणं मोक्षः भवति। |
san_Deva | hin_Deva | निरुक्तस्य कति अध्यायाः। | निरुक्त में कितने अध्याय है? |
kan_Knda | san_Deva | ಆ ಅಜ್ಞಾನದ ಒಂದು ವಿಷವಿದೆ. | तस्य अज्ञानस्य कश्चिद् विषयो भवति। |
hin_Deva | san_Deva | उदाहरण -अब्राह्मणः इत्यादि इस सूत्र के उदाहरण हैं। | उदाहरणम् - अब्राह्मणः इत्यादिकमस्य सूत्रस्योदाहरणम् । |
hin_Deva | kan_Knda | निदिध्यासन के द्वारा विपरीत भावना नष्ट होती है। | ನಿದಿಧ್ಯಾಸದಿಂದ ವಿಪರೀತಭಾವನೆ ನಾಶಗೊಳ್ಳುತ್ತದೆ. |
kan_Knda | hin_Deva | ಜಯತಃ - ಜಿಧಾತುವಿನಿಂದ ಶತೃಪ್ರತ್ಯಯ ಮಾಡಿದಾಗ ಪಂಚಮೀ ಏಕವಚನದಲ್ಲಿ ಅಥವಾ ಷಷ್ಠೀ ಏಕವಚನದಲ್ಲಿ ಆಗುತ್ತದೆ. | जयतः - जिधातु से शतृप्रत्यय करने पर पञ्चमी एकवचन में अथवा षष्ठी एकवचन में। |
hin_Deva | san_Deva | “पूर्वापराधरोत्तरमेकदेशिनैकाधिकरणे'' सूत्र की व्याख्या की गई है? | "पूर्वापराधरोत्तरमेकदेशिनैकाधिकरणे" इति सूत्रं व्याख्यात। |
san_Deva | hin_Deva | सूत्रव्याख्या - इदं विधिसूत्रम्। | सूत्र व्याख्या-यह विधिसूत्र है। |
san_Deva | kan_Knda | तिङन्तानां पदानां सामान्येन अनुदात्तस्वरः एव विधीयते । | ತಿಙಂತ ಪದಗಳಿಗೆ ಸಾಮಾನ್ಯವಾಗಿ ಅನುದಾತ್ತಸ್ವರಗಳ ವಿಧಾನವೇ ಆಗಿರುತ್ತದೆ. |
hin_Deva | san_Deva | अन्य भी आक्षेपादि के द्वारा भ्रमित कर सकते हैं। | अन्येऽपि आक्षेपादिना भ्रामयितुं शक्नुवन्ति। |
kan_Knda | hin_Deva | ಶೃಣೋತಿ - "ಶೃ ಶ್ರವಣೇ" ಈ ಧಾತುವಿನಿಂದ ಲಟ್ ಪ್ರಥಮಪುರುಷ ಏಕವಚನದಲ್ಲಿ ಶೃಣೋತಿ ಈ ರೂಪವು ಆಗುತ್ತದೆ. | शृणोति - ' श्रु श्रवणे' इस धातु से लट् प्रथमपुरुष एकवचन में शृणोति यह रूप है। |
hin_Deva | san_Deva | जिसे विवेकचूडामणी में इस प्रकार से कहा गया है। | तदुक्तं विवेकचूडामणौ । |
kan_Knda | san_Deva | ಟಿಪ್ಪಣಿ - ವಿದ್ಯಮಾನವಾಗಿಲ್ಲ ಹಿಂಸಾ ಯಾವುದರಲ್ಲಿ ಇದೆಯೋ ಅದನ್ನು ಅಧ್ವರ ಎಂದು ಕರೆಯುತ್ತಾರೆ. | टिप्पणी - न विद्यते ध्वरः हिंसा अस्य इति अध्वरः। |
kan_Knda | hin_Deva | ೧೦. ಸಾಮರ್ಥ್ಯದಿಂದ ಕ್ಷಿಪ್ರವಚನಃ. | 10. सामर्थ्य से क्षिप्रवचनः। |
hin_Deva | kan_Knda | मात्रार्थम् यहाँ पर अर्थ शब्द उत्तरपद में है। | ಮಾತ್ರಾರ್ಥಮ್ ಇಲ್ಲಿ ಅರ್ಥ ಶಬ್ದವು ಉತ್ತರಪದದಲ್ಲಿದೆ. |
hin_Deva | san_Deva | तिसृभ्य यहाँ पर पञ्चमी विधान से तस्मादित्युत्तस्य इस परिभाषा से यहाँ परस्य यह पद उपस्थित होता है। | तिसृभ्य इत्यत्र पञ्चमीविधानात् तस्मादित्युत्तस्य इति परिभाषया अत्र परस्य इति पदमत्र उपतिष्ठते। |
san_Deva | kan_Knda | मन्त्रात्मकस्य ऋग्वेदस्य अयमंशः। | ಈ ಮಂತ್ರಾತ್ಮಕ ಋಗ್ವೇದದ ಅಂಶವೇ ಆಗಿದೆ. |
hin_Deva | kan_Knda | इस सूत्र से प्रकृतिस्वर का विधान है। | ಈ ಸೂತ್ರದಿಂದ ಪ್ರಕೃತಿಸ್ವರವನ್ನು ಆರಿಸಲಾಗಿದೆ. |
kan_Knda | hin_Deva | ದೋಷತ್ರವು ಮಲ, ವಿಕ್ಷೇಪ, ಆವರಣ ಎಂದು. | वे तीन दोष है मल, विक्षेप तथा आवरण। |
san_Deva | kan_Knda | एतदुपहितं चैतन्यम् अर्थात् ईश्वरः हिरण्यगर्भः विराड् च। | ಇದರಿಂದ ಉಪಹಿತವಾದ ಚೈತನ್ಯ ಅಂದರೆ ಈಶ್ವರ ಹಿರಣ್ಯಗರ್ಭ ಅಥವಾ ವಿರಾಟವೆಂದು ಕರೆಯುತ್ತಾರೆ. |
san_Deva | hin_Deva | अपरे पुनर्विद्वांसो विण्डिश- ओल्डेनवर्ग-पिशेलमुख्या अभिप्रयन्ति यत् संवादसूक्तानि पुरा गद्यपद्यात्मकानि आसन्। | दूसरे विद्वान विण्डिश-ओल्डेनवर्ग-पिशेल आदि मुख्य मानते हैं कि संवाद सूक्त प्राचीन काल में गद्य पद्यात्मक थे। |
san_Deva | hin_Deva | तथैव सदेव सोम्य इदम् अग्र आसीत्। | उसी प्रकार सद् ही सौम्य रूप में सबसे पहले था। |
kan_Knda | hin_Deva | "ಮನಸೈವಾನುದ್ರಷ್ಟವ್ಯಮ್" ಎಂಬ ಶೃತಿ. | "मनसैवानुद्रष्टव्यम्" इति श्रुति है। |
hin_Deva | san_Deva | तिङतिङ: इस सूत्र से तिङ् इस प्रथमान्त पद की अनुवृति है। | तिङ्ङतिङः इति सूत्रात् तिङ् इति प्रथमान्तं पदम् अनुवर्तते। |
kan_Knda | san_Deva | ಪ್ರತಿಬಿಂಬವೂ ಸ್ವಚ್ಛ ಪದಾರ್ಥವೇ ಆಗಿರುತ್ತದೆ ಅಲ್ಲವೇ? | प्रतिबिम्बस्तु स्वच्छे पदार्थ खलु भवति। |
kan_Knda | san_Deva | ಇದರಿಂದ ಚಿತ್ ಪ್ರತ್ಯಯಾಂತದ ಪ್ರಕೃತಿಸಮುದಾಯದ ಅಂತ್ಯದಲ್ಲಿರುವ ಸ್ವರವನ್ನು ಉದಾತ್ತವನ್ನಾಗಿ ಮಾಡುವ ನಿಯಮವಿದೆ. | अनेन चित्प्रत्ययान्तस्य प्रकृतिप्रत्ययसमुदास्य अन्त्यस्य स्वरस्य उदात्तत्वं विधीयते। |
kan_Knda | san_Deva | ಅಮೃತಕ್ಕಾಗಿ ತ್ಯಗ ಒಂದು ಸಾಧನ. | अमृतत्वाय त्याग एव एकं साधनम् । |
san_Deva | kan_Knda | तदेव प्रकाशस्वरूपं ब्रह्म अत्र अहं पदेन परिलक्ष्यते। | ಇಲ್ಲಿ ಅಹಂ ಪದದಿಂದ ಬ್ರಹ್ಮನೇ ಸ್ವತಃವಾಗಿ ಪರಿಲಕ್ಷಿತವಾಗುತ್ತಾನೆ. |
san_Deva | kan_Knda | सरलार्थः - सः (मत्स्यः) उक्तवान् - यावत् वयं क्षुद्राः स्थाष्यामः तावत् अस्माकं महाभयम्। | ಸರಳಾರ್ಥ - ಅವನು (ಮೀನು) ಹೇಳಿದನು - ಎಲ್ಲಿಯವರೆಗು ನಾವು ಚಿಕ್ಕವರಾಗಿದ್ದೇವೆಯೋ ಅಲ್ಲಿಯವರೆಗು ನಮಗೆ ಬಹಳ ಭಯವಾಗುತ್ತದೆ. |
hin_Deva | san_Deva | किन्तु दसवें मण्डल में लघु-गुरू के ऊपर भी उचित विन्यास में भी सब जगह विशेष बल दिया। | प्राचीनकाले वर्णानां संख्याया उपरि छन्दोविन्यासे विशेषः आग्रहः आसीत्। |
kan_Knda | san_Deva | ೫. ಎಂತಹ ಜ್ಞಾನವು ಅಜ್ಞಾನದ ನಾಶಕವಾಗಿದೆ. | ५. कीदृशं ज्ञानम् अज्ञानस्य नाशकम्। |
hin_Deva | kan_Knda | उसके शत्रुओं द्वारा अजेय व् नए-नए दुर्गो में कुछ लौह से, और कुछ पत्थरों से निर्मित थे। | ಅವರ ಶತ್ರುಗಳಿಂದ ಅಜೇಯವಾದ ನವನವ ದುರ್ಗಗಳಲ್ಲಿ ಕೆಲವು ಲೋಹಗಳಿಂದ, ಕೆಲವು ಶಿಲೆಗಳಿಂದ ನಿರ್ಮಿತವಾದವು. |
hin_Deva | kan_Knda | और उसका विग्रह होता है-उक् इत् यस्य सः उगित्, तस्य उगितः। | ಮತ್ತು ಅದರ ವಿಗ್ರಹವಾಗುತ್ತದೆ - ಉಕ್ ಇತ್ ಯಸ್ಯ ಸಃ ಉಗಿತ್, ತಸ್ಯ ಉಗಿತಃ. |
san_Deva | hin_Deva | सोमस्य कृते आतिथ्येष्टिनामिकायाः इष्टेः विधानं वर्तते अस्मिन् स्थले।अस्याम् इष्टौ नवसु मृत्कपालेषु विष्णुम् उद्दिश्य पुरोडाशः अर्प्यते। | सोम के लिए आतिथ्येष्टि नामक इष्टी का विधान है यहाँ इस इष्टी में नौ मृत्क-पाल विष्णु को उद्देश्य करके पुरोडाश को अर्पण किये जाते हैं। |
kan_Knda | san_Deva | ಕಾರಣಾಶರೀರವು ಯಾವುದು ? | किं कारणशरीरम्? |
kan_Knda | san_Deva | ಯಾವಾಗ ಕ ಯೌಗಿಕ ಆಗಿರುತ್ತದೆ ಆಗ ಸ್ಮೈ ಯೋಗ ವ್ಯತ್ಯಯವನ್ನು ನೋಡಬಹುದು. | यदा तु क इति यौगिकः तदा स्मैयोगः व्यत्ययेन इति द्रष्टव्यम्। |
hin_Deva | san_Deva | तीसरे प्रपाठक में चार होताओं के चित्त में उपयोगी मन्त्रों का सङ्ग्रह है। | तृतीयप्रपाठकः चातुर्होत्रचितेः उपयोगिनां मन्त्राणां सङ्ग्रहोऽस्ति। |
hin_Deva | kan_Knda | अतः दोनों पूर्वपद और उत्तपद को जैसे पूर्व स्वर था वैसे ही समास होने के बाद भी रहता है। | ಆದ್ದರಿಂದ ಅವುಗಳ ಪೂರ್ವಪದ ಮತ್ತು ಉತ್ತರಪದಗಳಿಗೆ ಹೇಗೆ ಪೂರ್ವಸ್ವರವಿತ್ತೋ ಹಾಗೆಯೇ ಸಮಾಸವಾದ ನಂತರವೂ ಇರುತ್ತದೆ. |
kan_Knda | san_Deva | ಪ್ರಮಾತ್ಮಚೈತನ್ಯವು ಬುದ್ಧಿಯಲ್ಲಿ ಪ್ರತಿಬಿಂಬಿಸುತ್ತದೆ. | परमात्मचैतन्यं बुद्धौ प्रतिबिम्बते। |
san_Deva | hin_Deva | अस्मिन् आरण्यके महाव्रतस्य पञ्चमे दिने प्रयोक्तव्या महानाम्न्यः ऋचः सन्ति। | इस आरण्यक में महाव्रत के पांचवे दिन में प्रयुक्त होने वाली महानाम्न ऋचा है। |
hin_Deva | san_Deva | अठारहवें अध्याय में वसु के धार सम्बन्धी मन्त्रों का निर्देश है। | अष्टादशाध्याये वसोः धारासम्बन्धिनः मन्त्राः निर्दिष्टाः सन्ति। |
hin_Deva | san_Deva | पुनः जातिवाचक है। | पुनः जातिवाचकः अस्ति। |
kan_Knda | hin_Deva | ಅವನ ಉಪಾಸನೆಯನ್ನು ನೀವೆಲ್ಲರು ಮಾಡಬೇಕು. | उसकी ही तुम लोगो को उपासना करनी चाहिए। |
san_Deva | hin_Deva | प्रपाठकोऽयं सामान्यतः “अरण इति पदेन ज्ञायते। | यह प्रपाठक सामान्य रूप से `अरण' इस पद से जानी जाती है। |
kan_Knda | san_Deva | ಜನಾಃ, ಸರ್ವತೋಮುಖಃ ಪ್ರತ್ಯಂಜ್ಞ್ ತಿಷ್ಠತಿ ।।೪।। | जनाः , सर्वतोमुखः प्रत्यङ् तिष्ठति॥४ ॥ |
hin_Deva | san_Deva | मल की निवृत्ति के लिए निष्कामकर्मभूत यज्ञादि के द्वारा मल का निवारण करना चाहिए। | मलनिवृत्त्यर्थं निष्कामकर्म भूतयादि च मलं निवर्तयेत्। |
kan_Knda | hin_Deva | ಇಂದ್ರಿಯಗಳ ವೈಕಲ್ಯದ ಕಾರಣ ಇಂದ್ರಿಯ ಜನ್ಯ ಜ್ಞಾನದಲ್ಲಿ ಭ್ರಮೆ, ಪ್ರಮಾದ ಆದಿಗಳು ಉತ್ಪನ್ನವಾಗುತ್ತದೆ ಆದರೆ ಇಂದ್ರಿಯಾತೀತ ಜ್ಞಾನ ಯಾವುದಾದರು ದೂಷಣೆ ಮಾಡಿದ ಇಂದ್ರಿಯದಿಂದ ಆಗುವುದಿಲ್ಲ. | इन्द्रियों के वैकल्य के कारण इन्द्रियजन्य ज्ञान में भ्रम, प्रमाद आदि उत्पन्न होते हैं परन्तु इन्द्रियातीत ज्ञान किसी दूषित इन्द्रिय से नहीं होता है। |
kan_Knda | san_Deva | ಅಲ್ಲಿ ಇಷ್ಟ ಪ್ರಾಪ್ತಿಗಾಗಿ ಮತ್ತು ಅನಿಷ್ಟ ಪರಿಹಾರಕ್ಕಾಗಿ ಅಲೌಕಿಕ ಉಪಾಯವನ್ನು ಯಾವುದು ಹೇಳುತ್ತದೆಯೋ ಅದನ್ನೇ ವೇದ ಎಂದು ಕರೆಯುತ್ತಾರೆ. | तत्र इष्टप्राप्त्यनिष्ठपरिहारयोः अलौकिकम् उपायं वेदयति वेदः । |
san_Deva | kan_Knda | अस्मिन् सूक्ते अक्षक्रीडायाः प्रभावः प्रदर्शितोस्ति । | ಈ ಸೂಕ್ತದಲ್ಲಿ ಅಕ್ಷಕ್ರೀಡೆಯ ಪ್ರಭಾವವನ್ನು ಪ್ರದರ್ಶಿಸಲಾಗಿದೆ. |
kan_Knda | hin_Deva | ಶೂಷಮ್ ಎಂದರೆ ಏನು? | शूषम् इसका क्या अर्थ है? |
san_Deva | hin_Deva | अनुदात्तः इति प्रथमान्तं विधीयमानं पदम्। | अनुदात्तः यह प्रथमान्त विधीयमान पद है। |
san_Deva | kan_Knda | इतिथीम् इत्यभिनयः , तेन संख्येयां समां दर्शितवान्। | ಇತಿಥೀಮ್ ಇದು ಅಭಿನಯ, ಅದರಿಂದ ಸಂಖ್ಯೆಯ ಸಮಾನವಾಗಿ ನೋಡುತ್ತಾನೆ. |
san_Deva | hin_Deva | परन्तु द्विगोः तत्पुरुषसंज्ञा अभीष्टा, अतः विशेषेण सूत्रेण तत्पुरुषसंज्ञाया विधानं कृतम्। | परन्तु द्विगु की तत्पुरुष संज्ञा अभीष्ट होती है अतः विशेषण सूत्र से तत्पुरुषसंज्ञा का विधान किया गया है। |
kan_Knda | san_Deva | ವೇದದ ಯಥಾರ್ಥಜ್ಞಾನ ಲಾಭಕ್ಕಾಗಿ ಆರು ವಿಷಯಗಳ ಜ್ಞಾನದ ಅಪೇಕ್ಷೆ ಇರುತ್ತದೆ. | वेदस्य यथार्थज्ञानलाभाय षण्णां विषयाणां ज्ञानम् अपेक्षितं भवति। |
kan_Knda | san_Deva | ನಾಥಿತಃ - ನಾಥ್ - ಧಾತುವಿನಿಂದ ಕ್ತ ಪ್ರತ್ಯಯ ಮಾಡಿದಾಗ ಪ್ರಥಮಾ ಏಕವಚನದಲ್ಲಿ. | नाथितः - नाथ् - धातोः क्तप्रत्यये प्रथमैकवचने । |
hin_Deva | san_Deva | व्याख्या - ऋषि कहते हैं- वह मेरा मन शिवसङ्कल्प हो। | व्याख्या - ऋषिर्वदति । तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु। |
kan_Knda | hin_Deva | ಈ ಯಾಗದ ದೇವತೆಯು ಪ್ರಜಾಪತಿ, ಇಂದ್ರ, ಅಗ್ನಿಯಾಗುರುತ್ತಾರೆ. | इस याग के देवता प्रजापति, सूर्य, इन्द्र अथवा अग्नि होते हैं। |
hin_Deva | san_Deva | वो अमृतत्व का अधिपति है और साथ ही भोग्य वस्तुओं द्वारा बढ़ने वालों का भी अधिपति है। | स अमृतत्वस्य अधिपतिः। किञ्च भोग्यवस्तुभिः वर्धमानस्यापि अधिपतिः। |
hin_Deva | san_Deva | नैगम इस पद का यह तात्पर्य है की इनकी प्रकृति प्रत्यय का यथार्थ ज्ञान नहीं होता है - अनवगतसंस्कारांश्च निगमान्। | नैगमः इत्येतस्य पदस्य तात्पर्यमिदम् अस्ति यद् एतस्य प्रकृतिप्रत्ययस्य यथार्थावगमनं न भवति - अनवगतसंस्कारांश्च निगमान्। |
kan_Knda | hin_Deva | ಅಂದರೆ - ಘಟದಲ್ಲಿ ನಷ್ಟವಾದ ಘಟದ ನಾಶವು ಆದರೆ ವ್ಯೋಮ ಘಟಮಧ್ಯವರ್ತಿಯು ಆಕಾಶವು ವ್ಯೋಮದಿಂದಲೇ ತಾನೇ ಆಗುತ್ತದೆ, ತಾನೇ ಮಾಹಾಕಾಶವಾಗಿರುತ್ತದೆ. | अर्थात्- घट का नाश होता है तो जैसे व्योम घट मध्यवर्ती आकाश स्वयं व्योम होता है तथा स्वयं ही महाकाश होता है। |
hin_Deva | san_Deva | उसके बाद श्रवण मनन निदिध्यासनादि के विषय में भी कहा जाएगा। | ततश्च श्रवणमनननिदिध्यासनानि वक्ष्यन्ते। |
hin_Deva | san_Deva | धर्मराजध्वरीन्द्र के मत में भी वेदान्तपरिभाषा के अद्वैतवेदान्तप्रकरण ग्रन्थ में भी ब्रह्मसाक्षात्कार के हेतु के रूप में श्रवण मनन तथा निदिध्यासन को कहा गया है। | धर्मराजाध्वरीन्द्रविरचिते वेदान्तपरिभाषाभिधेये अद्वैतवेदान्तप्रकरणग्रन्थि अपि ब्रह्मसाक्षात्कारहेतुत्वेन श्रवणमनननिदिध्यासनानि निगदितानि। |
hin_Deva | san_Deva | तब वास्तविक रस्सी पदार्थ का ज्ञान उत्पन्न होता है। | तदा वास्तविकस्य रज्जुपदार्थस्य ज्ञानमुदेति। |
hin_Deva | san_Deva | 31. मन मनुष्य के किस किस का कारण है? | ३१. मन एव कारणं मनुष्याणां कयोः ? |
kan_Knda | hin_Deva | ಈ ಸೂತ್ರದಿಂದ ಅಮಾದೇಶವಾಗುತ್ತದೆ. | इस सूत्र से अमादेश होता है। |
kan_Knda | san_Deva | ಆಚಾರ್ಯರ ಮೂರು ಗಣಗಳು ಯಾವುವು? | आचार्याणां त्रयो गणाः के? |
kan_Knda | san_Deva | ಅಲ್ಲಿ ಅನಃ ಎನ್ನುವುದು ಪಂಚಮೀ ಏಕವಚನಾಂತ ಪದವಾಗಿದೆ , ಮತ್ತು ಚ ಎನ್ನುವುದು ಅವ್ಯಯ ಪದವಾಗಿದೆ. | तत्र अनः इति पञ्चम्येकवचनान्तं च इत्यव्ययपदं च। |
kan_Knda | hin_Deva | ಅಹಂ ಶಬ್ದದ ಅರ್ಥ ಆತ್ಮ ಎಂದು ಆಗುತ್ತದೆ. | अहं शब्द का यहाँ पर आत्मा अर्थ होता है। |
san_Deva | hin_Deva | तदा स प्रतिबिम्बः जीव इत्युच्यते। | तब वह प्रतिबिम्ब जीव कहलाता है। |
kan_Knda | hin_Deva | ಮೊದಲನೇ ಮತ್ತು ಎರಡನೆಯ ಅಧ್ಯಾಯಗಳಲ್ಲಿ ಮಹಾವ್ರತನ ವರ್ಣನೆಯು ಲಭ್ಯವಾಗುತ್ತದೆ. | पहले दूसरे अध्याय में महाव्रत का वर्णन उपलब्ध है। |
kan_Knda | san_Deva | ಆದ್ದರಿಂದ ಪ್ರತ್ಯಯ ಗ್ರಹಣ ಪರಿಭಾಷಾದಿಂದ ತಿಙಂತ ಇದರ ಲಾಭವಾಗುತ್ತದೆ. | अतः प्रत्ययग्रहणपरिभाषया तिङन्तमिति लाभः। |
hin_Deva | kan_Knda | “कर्त्तरि च'' यह सूत्र का क्या अर्थ है? | ಕರ್ತರಿ ಚ ಎಂಬ ಸೂತ್ರದ ಅರ್ಥವೇನು? |
san_Deva | kan_Knda | तस्यां दशायां येन वृत्तिविशेषेण पार्थिवं सुखम् अनित्यं परिणामे च दुःखजनकम् । | ಆ ದೃಷ್ಟಿಯಿಮ್ದ ವೃತ್ತಿವಿಶೇಷದಿಂದ ಪಾರ್ಥಿವ ಸುಖವು ಅನಿತ್ಯವಾದ ಪರಿಣಾಮದಲ್ಲಿ ದುಃಖಜನಕವಾಗಿದೆ. |
kan_Knda | hin_Deva | ಅವ್ಯಯಸಂಜ್ಞಾ ಆದಾಗ "ಅವ್ಯಯಾದಾಪ್ಸುಪಃ" ಇದರಿಂದ ಸುಪ್ ಇದರ ಲುಕ್ ಆಗುತ್ತದೆ. | अव्ययसंज्ञा होने पर “ अव्ययादाप्सुपः'' इससे सुप् का लुक् प्राप्त होता है। |
san_Deva | kan_Knda | उपासना द्वेधा । | ಉಪಾಸನೆಯು ಎರಡು ವಿಧ. |
kan_Knda | hin_Deva | ನೂರೆಂಟಕ್ಕಿಂತಲೂ ಅಧಿಕ. | अठारह सौ से भी अधिक। |
hin_Deva | san_Deva | इस सूत्र से समासान्त अच् प्रत्यय होता है। | अनेन सूत्रेण समासान्तः अच्प्रत्ययो विधीयते। |
san_Deva | hin_Deva | एवञ्च अत्र पदान्वयः इत्थं भवति- अनित्यसमासे अन्तोदात्तात् एकाचः उत्तरपदात् तृतीयादिः विभक्तिः उदात्तः अन्यतरस्याम् इति। | इस प्रकार यहाँ पदों का अन्वय होता है - अनित्यसमासे अन्तोदात्तात् एकाचः उत्तरपदात् तृतीयादिः विभक्तिः उदात्तः अन्यतरस्याम् इति। |
san_Deva | hin_Deva | तथा गुणक्रियाशब्दयोः समभिव्याहारे खञ्जपाचकः, पाचकखञ्जः इति रूपद्वयम् । | तथा गुणक्रियाशब्दों के समभिव्याहार में खञ्चपाचकः, पाचकखञ्जः ये दो रूप हैं। |
hin_Deva | san_Deva | हम जान सकते हैं कि कौन सा याग कितने दिनों में समाप्त होता है, किस प्रकार उन यागों का अनुष्ठान करना चाहिए इत्यादि। | वयं ज्ञातुं शक्नुमः कः यागः कतिषु दिनेषु समाप्यते, कथं वा तेषां यागानाम् अनुष्ठानं विधेयम् इत्यादि। |
hin_Deva | san_Deva | और अहि, वृत्रपृथ्वी के ऊपर सदा के लिए सोये अथवा कटी हुई लकडी के समान भूमि पर गिरे। | तथा सति अहिः वृत्रः पृथिव्याः उपरि उपपृक् सामीप्येन संपृक्तः शयते शयनं करोति छिन्नकाष्ठवत् भूमौ पततीत्यर्थः॥ |
kan_Knda | san_Deva | ವೇದಾಧ್ಯಯನಕ್ಕೆ ಗುರುವಿನ ಮನೆಗೆ ಹೋಗುವುದು ಮತ್ತು ವೇದಾಂತ ಕೇಳುವುದಕ್ಕೆ ಗುರುವಿನ ಹತ್ತಿರ ಹೋಗುವುದು ದ್ವಿವಿಧ ಗುರುಗೃಹಗಮನಮ್ ಎಂದು ಹೇಳಿದೆ. | वेदाध्ययनाय गुरुगृहगमनं वेदान्तश्रवणाय च गुरुसमीपगमनम् इति द्विविधं गुरुगृहगमनम् इति उक्तप्रायं भवति। |
hin_Deva | san_Deva | चार लाख बत्तीस हजार अक्षर है' (अनु. अन्तिम भाग में)। | चत्वारिंशत्सहस्राणि द्वात्रिंशच्च अक्षरसहस्राणि' (अनु.अन्तिमे भागे)। |
hin_Deva | san_Deva | इस सूत्र में दो पद हैं। | सूत्रेऽस्मिन् द्वे पदे स्तः। |
hin_Deva | kan_Knda | उपनिद, गीता, ब्रह्मसूत्र। | ಉಪನಿಷತ್, ಗೀತಾ, ಬ್ರಹ್ಮಸೂತ್ರಮ್. |
hin_Deva | kan_Knda | जिस प्रकार राजपुरुषम् आनय (राजपुरुष को लाओ) ऐसा कहने पर पुरुष रूप अर्थ का आनयनम् (बुलाना) इष्टं न ही है राजन् पद का अर्थ राज्ञः। | ಹೇಗೆ ರಾಜಪುರುಷಮ್ ಆನಯ (ರಾಜಪುರುಷನನ್ನು ಕರೆತನ್ನಿ) ಹೀಗೆ ಹೇಳಿದಾಗ ಪುರುಷ ರೂಪದ ಅರ್ಥದ ಆನಯನಮ್ (ಕರೆತರುವುದು) ಇಷ್ಟವಲ್ಲ ರಾಜನ್ ಪದದ ಅರ್ಥ ರಾಜ್ಞಃ. |
kan_Knda | hin_Deva | ಪ್ರಪಂಚದಲ್ಲಿ ನಾಲ್ಕು ವೇದಗಳಿವೆ. | संसार में चार वेद है। |
hin_Deva | kan_Knda | चित्त की अशुद्धि निषिद्ध कर्मजन्य पाप ही होता है। | ಮನಸ್ಸಿನ ಅಶುದ್ಧಿಗಳು ನಿಷಿದ್ಧಕರ್ಮಜನ್ಯದ ಪಾಪವೇ ಆಗಿದೆ. |
kan_Knda | hin_Deva | ಈ ಸೂಕ್ತದಲ್ಲಿ ನೂರು ಶರದೃತುವರೆಗೆ ಮತ್ತು ನೂರು ಹೇಮಂತ ಋತುವಿನವರೆಗು ಜೀವನಕ್ಕಾಗಿ ಅನೇಕ ಪ್ರಕಾರವಾದ ಮೃತ್ಯುಗಳಿಂದ ರಕ್ಷಣೆಗಾಗಿ ಅನೇಕ ರೋಗಗಳ ರಕ್ಷಣೆಗಾಗಿ ಮತ್ತು ಪ್ರಾರ್ಥನೆಗಾಗಿ ಸಮುಪಲಬ್ಧಿಗಾಗಿ ಇದೆ. | इस सूक्त में सौ शरद ऋतु तक तथा सौ हेमन्त ऋतु तक जीवन के लिए अनेक प्रकार की मृत्यु से रक्षा के लिए अनेक रोगों से रक्षा के लिए प्रार्थना प्राप्त होती है। |
san_Deva | hin_Deva | अयमेव सर्वेषां चराचरजीवानाम् आधारः। | यह ही सभी चर अचरजीवो का आधार है। |
san_Deva | hin_Deva | अतः सूत्रस्यास्य अर्थः भवति- तिङन्तात् पदात् पराणि गोत्रादीनि अनुदात्तानि भवन्ति कुत्सनाभीक्ष्ण्ययोः गम्यमानयोः इति। गोत्रादिगणे गोत्र ब्रुव प्रवचन प्रहसन प्रयतन पवन यजन प्रकथन प्रत्यायन प्रचक्षण विचक्षण अवचक्षण स्वाध्याय भूयिष्ठा इत्यादयः शब्दाः पठिताः। | अतः इस सूत्र का यह अर्थ है - तिङन्त पद से परे गोत्रादि अनुदात्त होते है, कुत्सन आभीक्ष्ण्य गम्यमान होने पर गोत्रादिगण में गोत्र, ब्रुव, प्रवचन, प्रहसन, प्रयतन, पवन, यजन, प्रकथन, प्रत्यायन, प्रचक्षण, विचक्षण, अवचक्षण, स्वाध्याय, भूयिष्ठा इत्यादि शब्द पढ़े गए है। |
san_Deva | hin_Deva | परन्तु वृत्रः तं शस्त्रेण हन्तुमसमर्थः इन्द्रस्यैव वज्रेण हतः। | परन्तु वृत्र उसको शस्त्र से मारने में असमर्थ और इन्द्र के ही वज्र से मारा गया। |
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