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ताकि भगवान का दिया तोहफा 'वर्षा जल' सही तरीके से हमारे काम आ सके।
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कुछ पाने की हो आस आस
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झूठ-मूठ उसने कहा,
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फिर चील के बच्चे ने पूछा माँ मैं इतना ऊँचा क्यों नहीं उड़ पाता।
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जो हर प्रकार की उचित जानकारी मुहैया करवाती है
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क्या लगता है तुम्हें? बादल क्यों गरजते हैं?
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हाँ, इसमें रुपये पानी की तरह बहाना पड़ेगा,
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दादाजी ने कुछ कहा नहीं।
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उसका पूरा चेहरा चाट लिया।
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अलगू चौधरी और समझू साहु !
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उसी वक्त मुझे निकाल दिया और
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उर्मी उसकी परेशानी समझती थी लेकिन फिर भी कांता से उसे रश्क हो रहा था।
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विस्तृत न्याय भवन में सन्नाटा छा गया।
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पर भानुकुँवरि ने एक न मानी।
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राजा ने आज्ञा दी कि तेनालीराम को हाथी के पांव से कुचलवाया जाए|
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यह स्वीकार करने में हमको कोई आपत्ति नहीं कि
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जल्दी ही दीपावली आने वाली है।
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माना-बेटा, किसी के धन ज्यादा होता है,
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पंचों ने दोनों पक्षों से सवाल-जवाब करने शुरू किये।
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सविता जी ने भरोसा कर के बिजनेस उसको सौंप दिया।
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दो करोड़ अमरिकी डॉलर की मदद मिली
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आया तूफ़ान धूल उड़ाए।
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जितना दुष्कर समझते थे,
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मोरू को देख कर लगता था कि गंगा के इस पार या
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तेज़ बारिश पड़ने लगी।
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वह जहाँ ले जाए।' -
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नरसी कहता है कि संक्रांति में उसे चिगडी खाना अच्छा लगता है।
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'रुकिए-रुकिए,' मैं चिल्लाता हुआ पेड़ की ओर दौड़ा।
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शिक्षक धीरे-धीरे वहाँ से निकले।
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मोटे राजा का है दुबला कुत्ता।
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अल्लाह के बन्दे
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लम्बा था, दूसरे की कदकाठी बहुत मज़बूत थी।
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पर यह नहीं देख सकता कि उसके प्रमोद को कुछ हो जाए।'
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घायल परिंदा है तू
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आसमान खाली होता तो इसमें ज़रा भी मज़ा नहीं आता।
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वर्गीज कुरियन दूध की कमी से परेशान भारत को
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उसके क्षतों को अपनी स्निग्ध दृष्टि और
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अतएव अवसर तथा धनाभाव-जैसे प्रबल शत्रुओं के
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लेकिन शहीद की विधवा का दर्द क्या होता है ?
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'तेनालीराम को गिरफ्तार करके हमारे सामने पेश किया जाए'|
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दस मिनट के बाद भेड़िया बोला,
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लिए अनेक गाड़ियाँ हैं,
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अगर कल तक में उनके पास चला गया होता,
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कदापि समावेश न होना चाहिए।
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भारत की आज़ादी के लिए चर्चा करनी शुरू की.
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बिल्कुल वही नाक -नक्श थे।
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गढ्ढा बहुत गहरा है,
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तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे,
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मैं उसकी मदद कर पाऊँ उससे पहले ही टाइगर उसके पास पहुँच गया और
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जो कुछ बल था, वह इसी बही-खाते का था।
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इसके बाद त्रिभुवनदास ने
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जो भी हो कल फिर आएगा
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उसके आदमियों की तस्वीरें खींच रहे हैं|
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'अभी पकड़ते हैं उनको!'
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वह हार नहीं मानेगी न आज और न कल.
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जया नीचे चली गई थी।
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इतना जब्त इससे हुआ कैसे?
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माता ने बहू की तरफ मर्मांतक दृष्टि से देखा और बोली-क्यों भैया?
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फिर वे घास पर चलते मेरी तरफ़ आये।
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बैल ने एक बार फिर जोर लगाया;
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क्या लोग थे वो अभिमानी
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दस किलो दूध पी जाते। पचास रोटी खाते।
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घास पर पड़ी सीढ़ी को देख कर मेरे मन में आया कि
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पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को भारतीय समाज के सभी वर्गों
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पर उसके हृदय में ये शब्द गूँज रहे थे-क्या
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बर्तनो का व्यापारी बोला
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हाँ, काम-काज की आसानी के खयाल से
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उन्हें दो साल तक जेल में रखा गया.
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उससे तो वह भी छीन लिया था।
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तो क्या देखता है कि तेनालीराम बिल्कुल ठीक हो गया है|
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उन्होंने मुझे ज़रूरत की चीज़ों की एक लम्बी सूची दी :
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गर्मियों में सूर्यास्त थोड़ा और
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कर हर मैदान, हर मैदान
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क्योंकि ईमान का सबसे बड़ा शत्रु अवसर है।
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तो वह घबरा गई।
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हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलसिताँ हमारा
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अम्बर पनाहे मांगे
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धूप अत्यंत तेज थी और कभी एक-दो व्यक्ति सिर पर
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मृ-दं-गम! धम, धम, धम!
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जन्नत से मुलाकात हो
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श्यामल काका इसमें सबसे आगे थे।
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वह संतरी हमारा, वह पासबाँ हमारा
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साहु जी ने बहुत पीटा, टाँग पकड़ कर खींचा,
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उसके लिए डेढ़ घंटे तक रोने के बाद सोया था।
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'बेवकूफ़ बूढ़े! तुम हमारा समय नष्ट कर रहे हो,
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किसने किया ऐसा?
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घर की ओर सरकता नजर आया।
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वे प्रायश्चित करते थे.
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ज़रा याद करो क़ुरबानी
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क्या मैं थोड़ा लालच कर के एक-दो भुट्टे भी खा लूँ?
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बेला से नाव टकराई।
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अधिकतर दूकानें बंद हो चुकी थीं।
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उसके दाने-चारे का कोई अच्छा प्रबंध न किया गया।
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'सुबह सुबह मजाक करने का टाइम नहीं है मेरे पास चलो निकलो यहां से|
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उसने उन्हें हाथों में अंक पकड़ाए।
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सूर्य की किरणें दिखाई देती हैं,
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उर्मी आश्चर्य से बोली,' पागल हो गई है, दूध पिला और
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यह सुनकर महाराज कृष्णदेव राय समझ गए कि
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किसान पहले थोड़ा घबराया,
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तो बहुत से लोग पुल बनवाने का ठेका पाने की जुगत में लग गए|
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