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कितना शीतल है,
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किसी के कुरते में बटन नहीं है,
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एक-दो क्षण बाद रोटी के टुकड़े को धीरे-से हाथ से
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उर्मी हतप्रभ रह गई, कांता की गोद से बच्चे को लेते हुए बोली ,
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उन्होंने भी यही कहा कि अब दावे में जरा भी जान नहीं है।
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उसके पास स्लेट भी नहीं थी।
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अलगू-अब इसका क्या जवाब दूँ ?
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इन गीतों को कजरी कहते हैं।
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मैंने कहा, 'आपके स्कूल के ज़माने की पिक्चर टीवी पर आ रही है, देख लीजिये।'
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एक से एक भड़कीले वस्त्र पहने हुए,
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का दिन था क्योंकि निशा आर्मी में सेलेक्टेड हो गई थी।
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और इतने दिन तक सारे कागज-पत्र अपने हाथ में थे।
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हिफ़ाज़त कर सकें,
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आकाश में बड़े-बड़े काले बादल घिर आए हैं और
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वे पेड़ की आधी ऊँचाई तक पहुँच चुके थे|
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पंडित जी हमें मँझधार में छोड़कर सुरपुर को सिधर गये,
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अदालत पर सत्यनारायण की सत्यता स्पष्ट रुप से प्रकट हो जाती,
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यूँ तो सारे सुख हैं बरसे
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उन्होंने मुझे बार-बार धन्यवाद दिया।
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जो प्रगल्भ होता है और
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ज़रा याद करो क़ुरबानी
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मैंने अज्जी से पूछा, 'क्या मैं कुछ लड्डू खा लूँ?'
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पड़ोस के घर से सुई-तागा लाने को दौड़ा जा रहा है.
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प्रकृति का यह नियम है कि विपरीत आवेश एक दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं।
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मनु बाँसुरी बजाना सीखना चाहता है।
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आज ईद का दिन और उसके घर में दाना नहीं.
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भेड़िया पूरी तरह से घर में घुस आया, मुड़ा और खरगोशों पर लपका|
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बरक्कत अपनी कमाई में होती है;
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संस्कृत में इसे शरत ॠतु का नाम दिया गया है।
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क्या वे कह सकती हैं कि इस आठ वर्ष की मुद्दत में
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कुछ दिनों बाद शिक्षक फिर वहाँ से जा रहे थे।
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बहुत-सी थैलियाँ लेकर आएँगे.
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अब धन आवेश वाले आयन हल्के होने की वजह से ऊपर उठते हैं और
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एक-एक पग चलना दूभर था। हड्डियाँ निकल आयी थीं;
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कर हर मैदान फ़तेह रे बंदेया
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केवल चमारों का कोलाहल सुनायी देता था।
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तुम्हारी कसम भी रह जाएगी,
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संयोग से अब यह गॉँव बिकने लगा।
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बस, गुरु जी की कृपा-दृष्टि चाहिए। अतएव यदि
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तो देश में आपत्तियों का प्रकोप क्यों होता ?
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किसान हैरान हुआ और बोला कि
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लेकिन भगवान को शायद कुछ और मंजूर था उर्मी का गर्भपात हो गया ।
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सत्यनारायण की नीयत पहले खराब न थी।
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उसने उन्हें हाथों में अंक पकड़ाए।
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उन्हें क्या खबर कि चौधरी आज आँखें बदल लें,
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बारह बज चुके थे।
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वे पेड़ की सबसे ऊँची चोटी पर चले जाएँगे और
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और सरकार की तरफ से भी किसानों को हरसंभव मदद मिलती है।'
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पर किसान तो वर्षा के देवताओं की पूजा करते हैं।
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श्यामल काका का गांव एक बार फिर से समृद्धि की तरफ लौटने लगा था।
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साहु जी बिगड़ कर लाठी ढूँढ़ने घर में चले गये।
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माता-यह अधर्म मुझसे न देखा जायगा।
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जिसमें यह कोई न कहे कि अपनी स्वामिनी को धोखा दिया।
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पूछना है जीत का पता
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दोनों बड़े लड़कों का कहीं पता नहीं था।
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चलाने के लिए राजा कृष्णदेव राय को सलाह भी दिया करते थे|
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इस मौसम में कई त्यौहार मनाये जाते हैं।
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ज्ञान की ज्वाला मन की जगह बाहर दहक रही थी।
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टाइगर मेरे पैरों के पास लेटा था।
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गीला बदन ठंडा लगता,
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तभी कड़क आवाज में महाराज ने तेनालीराम से पूछा:-
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ग्यारह बजे सारे गाँव में हलचल मच गई.
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शिक्षक ने ऊपर देखा और हल्के से मुस्कराये।
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लेकिन वह अड़ा रहा और बोला कि यह हमारा कर्त्तव्य है।
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एक आदमी की हँसी छूट गई।
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दादाजी बोले।
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मोरू धीरे से बोला,
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वह एक पुस्तक पढ़ रहीं थी।
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चढ़ गया नीला बक्सा उतारने के लिए।
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तो अब तक पंडिताइन का कहीं पता न लगता।
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यह लोगों को लंबे समय तक जीवित रहने और
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मेरा भविष्य बनाने के लिए उसने अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया है।
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और माँ ने कहा है कि कल वे पूड़ियाँ बनाने वाली हैं!
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उस पर अनगिनत मक्खियाँ उड़ रही थीं।
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तत्पश्चात किसी छंटे उस्ताद की भांति बोले,
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बाहर खड़े मेंढक लगातार कहते रहे
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यह सचमुच ही सुन्दर पेड़ है।
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लोटा-भर पानी लेकर गट-गट चढ़ा गई।
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अपने को अलग करते हुए स्त्री ने कहा।
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कुछ दिनों बाद शिक्षक फिर वहाँ से जा रहे थे।
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मैं पसीना-पसीना हो गया।
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डॉक्टर ने कहा उनको ढेर सारा गर्म भोजन और नींद चाहिए थी।
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जिसमें इस गॉँव का और रुपये का जिक्र ही न होता,
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ग्रामीणों का वह दल इस विषय में
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पर हिम्मत न थी,
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अब सब आसान हो गया।
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अँधेरी रात में जब सभी घर दियों और
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एक दिन गप्पू बोला, 'मुझसे कुश्ती लड़ोगे?'
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हो गया ठंडा थोडी ही देर में,
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वह बोले-हाँ, जरूर पंचायत करो। फैसला हो जाय।
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इसके मैं तुम्हें 1000 रुपए दे दूंगा।
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तिस पर भी बचाव की युक्ति निकल सकती है।
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एक सैनिक की पत्नी होने का गौरव क्या होता है ?
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उसके चले जाने के बाद आकर स्त्री से पूछने लगे-यह शैतान की
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- चंपा रोष से जल रही थी।
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मोहनदास गांधी एक विजेता के तौर पर स्वदेश लौटे.
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हाथ-पैर धोने के बाद वह यंत्र की
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केवल चमारों का कोलाहल सुनायी देता था।
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शुरूआत में बड़ी संख्या और
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मालकिन से पूछा-कागजात आपने उठवा लिए हैं।
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