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पर भानुकुँवरि ने एक न मानी।
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तू कैसे भूलाएगा
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पोतवाहिनी पर असंख्य धनराशि लादकर
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यदि पूर्णमासी के दिन यहाँ की यात्रा की
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और बच्चों के साथ हामिद भी जा रहा था.
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भीषण आँधी,
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दोनों के बीच में इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान हो जाता है।
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किंतु नागरकोविल उसकी तुलना में काफी सस्ता है।
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फलियों पर उनका कोई स्वत्व है या नहीं;
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जो केवल विश्वास जमाने के निमित्त दर्शाये गये थे।
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विदेशों से भी फोटोग्राफर आ चुके थे।
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दादाजी अब भी बेखबर सोये हुए थे।
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अपने पेट की गुड़-गुड़ गुड़-गुड़…
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कि जिस तरह नीम के पेड़ की आयु अन्य वृक्षों की अपेक्षा लंबी होती है उसी तरह आप भी दीर्घायु हो'|
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अलगू चौधरी के घर था तो चैन की बंशी बजती थी।
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पिछले साल अलगू चौधरी बटेसर से
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अगर जुम्मन को खर्च देना मंजूर न हो,
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13 बरस की उम्र में मोहनदास गांधी की
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और अब एक बड़ी विचित्र बात हुई.
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रास्ते में ही एक हलवाई की दुकान थी।
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पंचों ने तुम्हारे मामले पर अच्छी तरह विचार किया।
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बैल के मर जाने से समझू को हानि हुई।
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' दादाजी ने सिर हिलाया, 'मुझे खेद है, पर मैं नीचे नहीं आ सकता।
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अखबार में आज फिर पड़ोसी गांवों के किसानों की आत्महत्या की खबर छपी थी,
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गाँधी जी और उनके अनुयायी, गुजरात में 24 दिन तक पैदल चले।
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और उससे भी बड़ी बात यह थी कि उसे पढ़ना-लिखना अच्छा लग रहा था।
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मैंने दौड़कर सीढ़ी खड़ी की और तेज़ी से ऊपर चढ़ा।
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पर मान-वृद्वि की महँगी वस्तु है।
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गांधी के अहिंसक आंदोलन की अपील
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वे कह रहे थे कि पेड़ों को बचाना उनका कर्त्तव्य है।
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बैंक, कुमारी अम्मां मंदिर, गगनाथा स्वामी मंदिर,
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इस नीति-परायणता की प्रशंसा जी खोलकर कर रहे थे।
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अपनी तबीयत से प्रूफरीडरी का काम सीखता था।
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मिट्टी का दीपक बाँस की पिटारी में भागीरथी के तट पर
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ऐसा नहीं हो सकता और हम अपना इरादा यह सोचकर बदल लेते हैं
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अब सब कुछ ठीक-ठाक हो चुका था।
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यह बहुत शान्त जगह थी।
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जिस तरह कलुषित हृदयों में कहीं-कहीं धर्म का धुँधला प्रकाश रहता है,
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अँधेरा हो चला था और स्कूल में बिजली नहीं थी।
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'और तुम्हें चीर-फाड़ कर कच्चा खा जाऊँगा।'
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पेड़ों पर चढ़कर कच्चे आम तोड़ना मोरू को अच्छा लगता था।
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सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन गया।
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उन्होंने एक बड़ा सा गड्ढा खोदकर तेलानी राम को गर्दन तक दबाकर खड़ा कर दिया|
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अगर वह चिमटा ले जाकर दादी को दे दे,
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दादाजी को गुस्सा आ गया।
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दस मिनट के बाद भेड़िया बोला, 'मज़ा आ गया! प्
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नेता दोनों को प्रेरित करना भी है.
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और उससे भी बड़ी बात यह थी कि उसे पढ़ना-लिखना अच्छा लग रहा था।
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उसने अपनी माँ से कोलम बनाना सीखा।
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मुझे उनकी गड़गड़ाहट भी सुनाई दे रही है।
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‘तो बताते क्यों नहीं, कै पैसे का है?’
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पंडित जी ने हिसाब-किताब का समझना भी छोड़ दिया।
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मकान बनाने के लिए पेड़ काटने की इजाज़त दी है।
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यह लोगों को लंबे समय तक जीवित रहने और
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यह कैसे हुआ?
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जीती-जितायी बाजी हाथ से निकली जाती थी,
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मीनू ने अपनी मां को कहा
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पाप के अथाह दलदल में जहाँ एक बार पड़े कि
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जवान लड़की मारी -मारी घूमती है !!
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ऐसा कैसे होता?
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आइए जानते हैं कि अहिंसा और शांति का ये पुजारी,
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राजकीय सम्मान के साथ सुहास को मुखाग्नि दी गई थी।
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यदि हम और पेड़ नहीं उगा सकते तो हमें उन्हें नष्ट भी नहीं करना चाहिए।
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तारक-खचित नील अंबर और समुद्र के अवकाश में
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बरक्कत अपनी कमाई में होती है;
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आज़ादी का जश्न मना रहा था.
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भानुकुँवरि ने क्रोध से कॉँपते हुए
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दबे-कुचले समुदायों को भी प्रशिक्षण दे रहा है.
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'अब तुम्हें घर जाना चाहिये मोरू, पर कल फिर आ सकते हो?'
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और मुझे, छोड़ दो इन निरीह भोले-भाले प्रणियों के दुख
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मुंशी जी ने चने के दानों की ओर
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उन्होंने पंचायत करने की धमकी दी।
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आजकल के न्याय करने वाले बिलकुल आँख के अँधे हैं।
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मेरा पेट पहले ही भर चुका है।
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मैने उसकी कुछ तस्वीरें ली है जरा देखो) उस फोटोग्राफर ने कहा।
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दादाजी उन पर सेब के छिलके और खाली डिब्बे फेंककर मारने लगे।
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यही एक अवसर है।
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एक-एक ग्रास को इस तरह चुभला-चबा रहे थे,
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वह काफी छोटे-छोटे टुकड़े
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नहीं तो, बुधगुप्त को इतना ऐश्वर्य क्यों देते?'
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इतना पुराना मित्रता-रूपी वृक्ष सत्य का एक झोंका भी न सह सका।
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चारों तरफ कोलाहल मच रहा था।
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अब मुश्किल नहीं कुछ भी
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चंपा-नगरी की एक क्षत्रिय बालिका हूँ।
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इस युद्ध में विजय नगर के महाराज कृष्णदेव राय की विजय हुई|
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अतल जल में डुबा देती हूँ।
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नैन आंसू जो लिये हैं, ये राहों के दिये हैं
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और जिस तरह बिल्ली चूहे पर झपटती है,
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तब से मैं तुम्हारा प्राण-घातक शत्रु बन गया था;
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ससुराल में तिरस्कार पूर्ण जीवन जीने से तो बेहतर था कि
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'भगवान, मेरे दादाजी को बचा लो।'
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दक्षिण अफ्रीका में
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वे बड़े चाव से सेब खा रहे थे।
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गॉँव तुम्हें मुबारक रहे; मगर ईमान आदमी का सब कुछ है।
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किसी ने रेवड़ियाँ ली हैं, किसी ने गुलाब जामुन,
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डर के मारे, जले हुए भेड़िए की जान निकल गई।
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महानाविक बुधगुप्त की आज्ञा सिंधु की लहरें मानती हैं।
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रामचंद्र ने अपनी बड़ी-बड़ी भावहीन आँखों
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यह तो हवा - और क्या?
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उसने पूछा। खाँसते हुए माँ बोलीं, 'वे सब यात्रा पर जा रहे हैं।'
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