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कुछ क्षण बीतने के बाद डरते-डरते उसने पूछा,
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ज्यादातर लोग एक जमाने से चले आ रहे खेती के ढर्रे को बदलना नहीं चाहते थे।
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'ठीक है,' टुल्लु ने कहा।
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तो उनकी दृष्टि तेनालीराम पर पड़ी जो अपने कुर्ते की जेब से
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स्वतंत्रता के साथ अपनी प्रबल लेखनी से
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तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने
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तब लोहे से लोहा टकराता है
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बहुत से दीन दुखी,
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विजयनगर राज्य के महाराजा कृष्णदेव राय के दरबार में तेनालीराम का प्रथम स्थान था
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कि तुम मौत से लड़कर आयी हो ?
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कहो न दीदी, हूँ न मैं समझदार?
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गांधी के इस ब्रिटेन दौरे के बारे में
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रामचंद्र ने उठते हुए प्रश्न किया,
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हर कोई यही कह रहा था औरत हो तो सविताजी जैसी
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ज़रा आँख में भर लो पानी
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रहस्य कथाएँ अकेली रहेंगी।
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लहरा लो तिरंगा प्यारा
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महाराज कृष्णदेव राय जादूगर से बोले:-
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इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ
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मैं देखने और इन्तज़ार करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता था।
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सर्दी के मौसम को संस्कृत में शिशिर ॠतु कहते हैं।
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मासूम सी मीनू बड़ी खुश हो गई कि वह भी तो परी बन गई है, खुशी खुशी वो स्कूल चली गई।
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लेकिन लोग हमें चैन नहीं लेने दे रहे।
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फलियों पर उनका कोई स्वत्व है या नहीं;
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उन्होंने प्रत्येक राज्य के प्रत्येक गांव-कस्बों में मुनादी करवा दी कि
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जुम्मन ने क्रोध से कहा-अब इस वक्त मेरा मुँह न खुलवाओ।
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इसी तरह से एक महीना बीत गया अचानक रश्मि में की तबीयत में बदलाव आने लगा।
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कह दूंगी घर पर मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ था|
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दिन की रोशनी धुँधला चली थी।
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कलह का बीज बोकर यह सम्पत्ति मेरे किस काम आयेगी?
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तो सिद्धेश्वरी ने उठने का उपक्रम करते हुए प्रश्न किया,
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टूटा टूटा एक परिंदा ऐसे टूटा
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किंतु यहाँ अधिकांश दुकानों के
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लेकिन यह भी बात थी कि
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'यह कड़वे नीम के पौधे को उपहार में भेजने का तुम्हारा क्या मतलब है'? क्
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दोनों ही झल्लाये हुए कुत्ते की तरह चढ़ बैठते और
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चित्रकारों के दल ने एक बैठक की
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सब लोग जी जान से अपने काम में जुटे थे।
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दीदी, दीदी, कभी-कभी मैं सोचता हूँ…
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तंग, अँधेरी, दुर्गन्धपूर्ण कीचड़ से
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चीता हो।
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उसके दादा के गाँव में लोग बाँस की टोकरियों में
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मनुष्यों को उन्हें बेमुरौवत कहने का क्या अधिकार है,
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उस पेड़ के ऊपर एक चील घोंसला बनाकर रहती थी जहाँ उसने अंडे दे रखे थे.
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मनोरंजक घटनाओं से भरपूर यह कहानी पढ़िए और
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पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को भारतीय समाज के सभी वर्गों
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उस हीरे के व्यापारी ने जब वो पत्थर देखा तो देखता रह गया,
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ग्रामीणों का वह छोटा-सा दल,
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रोज ईद का नाम रटते थे.
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काफी आगे बढ़ाकर गली के छोर की तरफ निहारा,
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प्रभावित होकर कौन लोग दयालु बन जाते हैं.
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बुधगुप्त, वह दिन कितना सुंदर होता,
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फिर वे घास पर चलते मेरी तरफ़ आये।
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कक्षा में वह अपने को कैद महसूस करता था।
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इसके बाद उन्होंने जमशेदपुर स्थित टिस्को में
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'आप नीचे आ जाइये। हम आपको पेड़ के ऊपर नहीं छोड़ सकते।'
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शायद मोरू ने भी ऐसा ही किया। वह और बहुत कुछ करने लगा।
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'काका, अब इस उम्र में आपने क्या नया रोग पाल लिया है।
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अब आज ही उनकी तरफ से
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उन्होंने अपने मन में फैसला किया कि गॉँव मेरा है।
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के लिए अनशन करना शुरू किया.
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उनकी अपनी जेबों में तो
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वह देववाणी के सदृश है-और देववाणी में मेरे मनोविकारों का
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और जब वे परेशान हो जाते हैं तो मैं भी पेरशान हो जाता हूँ।
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की शुरुआत की.
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गांधी पढ़ने के लिए लंदन चले गए.
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दोनों मित्रों ने अपनी मित्रता को और
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तब वह चौपड़ और बड़ा-सा पासा निकालती है।
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उनकी गिरफ़्तारी के बाद असहयोग आन्दोलन शुरू हुआ और पूरे भारत में लोगों ने स्कूल,
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मैदान में पत्थर पड़ा था।
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इधर आओ और ध्यान से सुनो
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चमार मृदंग बजा-बजा कर गाते थे-
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सदृश पैसे को खूब पकड़ती।
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अगर वह चिमटा ले जाकर दादी को दे दे,
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दशहरा के दिन यानि नौरात्रों के दसवें दिन, मनु और
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उनके सामने कोई वकील जबान तो खोल नहीं सकता।
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'आपकी अवहेलना करने वाले या कम चिंता करने वाले और
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तेज़ी से भागते हुए वह पैर का दर्द भी भूल गया।
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की लहरों के साथ खेलते हैं।
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टुल्लु और बुल्लु ने एक दूसरे की ओर देखा।
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बहू ने सास की ओर देख कर कहा-हमको ऐसा धन न चाहिए,
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यहाँ देवराज इंद्र ने कन्याकुमारी मंदिर के द्वितीय प्रकार के
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उन्होंने दीवार पर झाँका जहाँ वह रोज़ टाँगें झुलाए बैठा रहता था
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उसका मुख पीला पड़ गया।
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तभी उन्हें लंदन के मशहूर इनर टेम्पल में क़ानून की
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ऐसे में नए कपड़ों के बारे में सोचना तो बहुत ही कठिन था घर में थर्माकोल का टुकड़ा पड़ा था।
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'हमारे सुयोग मित्र ने हमारे ऊपर अनाथों के साथ दगा करने का दोष लगाया है।
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मछलियों ने दोनों की रस्सियाँ बाँध दी थीं!
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दरबारों और कमेटियों में वे सम्मिलित होते,
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और पास की नीम के पेड़ पर बैठा
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अदालत ने माना तो माना, नहीं तो हार माननी पड़ेगी।
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रामचंद्र ने खाने की ओर दार्शनिक की भाँति देखा।
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उस मेंढक ने इशारा करके बताया की
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परंतु दो महाशय इस कारण रियायत करना चाहते थे कि
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हलवे-पुलाव की वर्षा-सी की गयी;
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जाइए, एकांत में बैठ कर सोचिए।
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‘ये बहुत डरावना और घृणास्पद है कि
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टाइगर चिंचिंयाता अंदर भागा।
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वह केवल सुंदर जाल था,
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काला आकाश, गर्म हवा और हरी घास पर टहलता मैं।
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